
रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे के अंतिम रूप देने के लिए आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो मंगलवार को दिल्ली पहुंचे। दिल्ली में सुदेश महतो भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर विधानसभा चुनाव पर चर्चा करेंगे। ऐसी संभावना जताई जा रही है बुधवार को आजसू पार्टी और बीजेपी के बीच सीट शेयरिंग पर चर्चा हो सकती है। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा सीटों पर एनडीए उम्मीदवार की जीत के लिए रणनीति बनेगी। इससे पहले सुदेश महतो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रांची आगमन पर एयरपोर्ट पर उनसे मुलाकात की थी। सुदेश महतो दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत कर कम से कम 10 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश रहे हैं। वहीं बीजेपी नेताओं की ओर से छह या सात सीटें देकर मनाने की कोशिश की जा रही है।



राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी एनडीए में शामिल सहयोगी दल आजसू पार्टी को 7 सीटें देने को तैयार है। यह भी दावा किया जा रहा है कि छह सीटें फाइनल हो गई, एक सीट पर जिच बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ 20 जुलाई को हुई बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। बीजेपी जो सीटें आजसू पार्टी को देने के लिए सहमत है, उनमें सिल्ली, रामगढ़, डुमरी, गोमिया, तमाड़ और बड़कागांव शामिल है, वहीं ईचागढ़ विधानसभा सीट को लेकर जिच अब भी कायब है। बीजेपी नेताओं में इस बात को लेकर नाराजगी है कि सहमति बने बिना आजसू पार्टी ने ईचागढ़ से उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और आजसू पार्टी के बीच गठबंधन नहीं हुआ था। उस चुनाव में भाजपा ने 81 सीटों में से 79 और आजसू पार्टी ने 53 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। जिसके कारण दोनों दलों को नुकसान उठाना पड़ा था। बीजेपी सिर्फ 25 सीटें ही जीत पाई, जबकि आजसू पार्टी को दो सीटें मिली। बाद में रामगढ़ उपचुनाव में आजसू पार्टी को जीत मिली थी।
जेएमएम का 43 और कांग्रेस का 32 सीटों पर दावा : झारखंड में इस बार भी इंडिया अलायंस में शामिल जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी और भाकपा-माले के बीच गठबंधन पर सहमति बन जाने की संभावना है। वर्ष 2019 में जेएमएम ने 43, कांग्रेस ने 31 और आरजेडी ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से जेएमएम को 30, कांग्रेस को 16 और आरजेडी को एक सीट पर सफलता मिली। बाद में मांडर उपचुनाव में एक और सीट कांग्रेस के खाते में आ गई। वहीं जेवीएम टिकट पर चुनाव जीते प्रदीप यादव भी कांग्रेस में शामिल हो गई। लेकिन रामगढ़ उपचुनाव में एक सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। इस बार कांग्रेस मांडर और पोड़ैयाहाट पर दावेदारी कर रही है। वहीं मांडू के बीजेपी विधायक जयप्रकाश भाई पटेल भी कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, ऐसे में मांडू सीट पर भी कांग्रेस की दावेदारी मजबूत हो गई है।
एनडीए में शामिल भाजपा-आजसू पार्टी और इंडिया अलायंस में शामिल जेएमएम-कांग्रेस को उम्मीदवारों को झारखंड की राजनीति में तेजी से उभरते जयरात महतो से भी बड़ी चुनौती मिलेगी। लोकसभा चुनाव में जयराम महतो की पार्टी ने रांची, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा और धनबाद समेत अन्य सीटों पर उम्मीदवार खड़ किया। इस चुनाव में भाजपा, जेएमएम और कांग्रेस के बाद सबसे अधिक वोट जयराम महतो की पार्टी को मिला। खुद जयराम महतो ने गिरिडीह में आजसू पार्टी और जेएमएम को कड़ी टक्कर दी, तो उनके सहयोगी रहे देवेंद्रनाथ महतो ने रांची और संजय मेहता का हजारीबाग में दमदार प्रदर्शन रहा। कई विधानसभा सीटों में जयराम महतो की पार्टी पहले और दूसरे स्थान पर रही। इस लिहाज से जेबीकेएसएस उम्मीदवारों का मनोबल काफी ऊंचा है। जयराम महतो की पार्टी के नेताओं का मानना है कि विधानसभा चुनाव 2024 में उनकी पार्टी सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

