
रांची। हेमंत सोरेन आसानी जीत जायेंगे विश्वास मत। संख्या बल को देखते हुए साफ है कि विश्वासमत सिर्फ औपचारिकता है। इसके बावजूद हेमंत सोरेन एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। यह उसी दन स्पष्ट हो गया था, जब हेमंत सोरेन ने अकेले सीएम पद की शपथ ली। झारखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब सीएम ने अकेले शपथ ली हो। आमतौर पर तीन-चार मंत्री तो सीएम के साथ शपथ लेते ही रहे हैं। बाद में मंत्रिमंडल का विस्तार होता रहा है। विश्वासमत के दौरान विपक्ष की मौजूदगी तो सदन में रहेगी, लेकिन उनके विरोध का कोई मतलब नहीं रहेगा, क्योंकि हेमंत के खेमे में 46 विधायक हैं, जबकि विपक्षी खेमे में किसी भी हाल में 30 से अधिक विधायक नहीं होंगे। विश्वासमत के लिए 39 विधायकों का समर्थन जरूरी है।



जेएमएम में कुछ विधायक नाराज चल रहे हैं। इनमें दो विधायकों ने बगावत कर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। इन्हें पार्टी ने निलंबित कर दिया है। आलमगीर आलम विश्वासमत के दौरान सदन में उपस्थित हो पाएंगे या नहीं, यह अदालत पर निर्भर है। आलम टेंडर घोटाले में अभी जेल में हैं। अदालत से उन्होंने मोहलत मांगी है। इस पर अदालत का फैसला आज ही किसी वक्त आ सकता है। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हेमंत के पास 40-42 विधायक तो हैं ही। इसलिए उनके विश्वास मत जीतने में किसी को संदेह नहीं है।
एनडीए में शामिल पार्टियां भाजपा और आजसू विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में हैं। वे विश्वासमत का विरोध तो करेंगी, लेकिन यह सिर्फ सिंबोलिक होगा। इसलिए उनके पास संख्या बल नहीं है। ले-दे के 30 विधायक उसके साथ हैं। भाजपा ने जोड़-तोड़ की कोई कोशिश भी नहीं की है। इसलिए माना जा रहा है कि हेमंत आसानी से विश्वासमत जीत लेंगे। मत विभाजन की स्थिति आई भी तो इंडिया ब्लाक एनडीए पर भारी पड़ेगा।
हेमंत सोरेन ने मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले मंत्रियों की सूची भी तैयार कर ली है। संभव है कि विश्वासमत हासिल करने के तुरंत बाद वे मंत्रियों के नामों का ऐलान भी कर दें। फिर उनके शपथ ग्रहण की औपचारिकता पूरी होगी। चंपाई सोरेन हेमंत की सरकार में मंत्री थे। सीएम बनने के बाद उनका पद खाली है। आलमगीर आलम ने इस्तीफा दे दिया है, इसलिए उनका पद भी खाली है। एक और मंत्री पद पहले से ही खाली पड़ा है। यानी हेमंत को तीन नए मंत्री बनाने हैं। जिन मंत्रियों के बदले जाने की चर्चा होती रही ह, उनमें बादल पत्रलेख और बन्ना गुप्ता के नाम आते रहे हं। इस बार नए मंत्रिमंडल में वे मंत्री बनते हैं या उनकी जगह किसी दूसरे को जगह मिलती है, यह सूची सार्वजनिक होने के बाद ही पता चलेगा। जिन्हें संभावित मंत्री के रूप में देखा जा रहा है, उनमें दीपिका पांडेय सिंह, प्रदीप यादव, इरफान अंसारी बैजनाथ राम और कल्पना सोरेन के नाम सर्वाधिक चर्चा में हैं। खैर, विश्वासमत के बाद मंत्रियों के नाम भी उजागर हो जाएंगे।

