
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के इलाकों में की गई कार्यवाही में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए वर्ष 2024 सर्वाधिक सफलताओं से भरा रहा है। जवानों ने इस वर्ष 217 नक्सलियों को ढेर किया है। 2001 से लेकर 2023 तक मारे गए नक्सलियों की अधिकतम संख्या 134 ही थी। इस वर्ष 2024 में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मुठभेड़ के भी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सुरक्षा बल इस साल सर्वाधिक नक्सलियों को ढेर करने में सफल रहे। इस सफलता के पीछे का बड़ा कारण अंदरूनी इलाके में बड़े पैमाने में खोले गए सुरक्षा बलों के कैंप हैं।
खोले गए 28 नए कैंप : सुरक्षाबलों ने इस वर्ष 28 नए कैंप खोले हैं, इनमें से ज्यादा कैंप नक्सलियों के कोर इलाकों में खोले गये हैं। इनमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर का अबूझमाड़ शामिल है। नये कैंप खुलने से सुरक्षाबलों को आॅपरेशन लांच करने में आसानी हुई और पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने पिछले 20 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। नशे के खिलाफ कार्रवाई में भी पुलिस को सफलता मिली है। इस वर्ष पुलिस ने 5 करोड़ 85 लाख रुपये से ज्यादा का गांजा जब्त कर 241 तस्करों को गिरफ्तार किया है।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि बस्तर संभाग को नक्सल मुक्त करने की दिशा में इस वर्ष 2024 में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को नक्सल मोर्चे पर हर ओर से सफलता मिली है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के थुलथुली के जंगलों में इस वर्ष अब तक की सबसे बड़ी मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 38 नक्सली ढेर हुए थे। इसके साथ ही पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सर्वाधिक 217 नक्सलियों को ढेर करने में सफलता मिली है, वहीं नक्सलियों के गढ़ कहे जाने वाले पूवर्ती, दुलेड़, कस्तुरमेटा, कच्चापाल, ईरकभट्टी जैसे अति संवेदनशील स्थानों पर 28 नए पुलिस कैंप भी खोले गए हैं। इसके परिणाम स्वरूप 792 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं 925 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, नक्सलियों से 284 हथियार भी जब्त किए हैं। वहीं सबसे कम 19 जवानों ने बलिदान दिया है। जवानों ने अपने दम पर कैंप खोले हैं। इसके बाद इलाके में विकास की गति तेज हो पाया है। उन्होंने बताया कि 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि 2024 की तरह 2025 में भी हमें बड़ी सफलताएं मिलेंगी। हमारे जवान नक्सलवाद के खात्मे के लिए पूरे जोश से आगे बढ़ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि नाराणपुर जिले के अबूझमाड़ का क्षेत्रफल साढ़े चार हजार वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां नक्सलियों के काफी अनुकूल है। यही कारण है कि अबूझमाड़ को नक्सलियों की अघोषित राजधानी माना जाता है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बस्तर संभाग में नक्सल आतंक से संपूर्ण शांति का मार्ग अबूझमाड़ से होकर ही निकलेगा, इसलिए अबूझमाड़ को नक्सल मुक्त करना जरूरी है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने इस बाबत अपनी रणनीति भी बदली है। नए वर्ष का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है, जिसमें नक्सलियों की अघोषित राजधानी अबूझमाड़ पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित होगा। बस्तर में मैदानी इलाके की घेराबंदी का काम 2024 में लगभग पूरा हो चुका है। अब वक्त अबूझमाड़ के घनघोर जंगलों को घेरने का है। अबूझमाड़ इस लिए भी अहम है क्योंकि यह नक्सलियों का सबसे सुरक्षित इलाका है। नक्सली इसे अपनी राजधानी बताते रहे हैं। आज तक माड़ का जमीनी सर्वे नहीं हुआ है। यहां के गांवों में आज तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। बस्तर के बाकी इलाकों की तुलना में सबसे चुनौतीपूर्ण इलाका अबूझमाड़ ही है। फोर्स अगर 2025 में माड़ को फतह कर लेती है तो 70 प्रतिशत नक्सलियों का सफाया बस्तर से हो जाएगा।
